किसी की चाहत पे ज़िंदा रहने वाले हम ना थे; किसी पर मर मिटने वाले हम ना थे; आदत सी पड़ गयी, तुम्हे याद करने की; वरना किसी को याद करने वाले हम ना थे।
दर्द को दर्द अब होने लगा है। दर्द अपने गम पे खुद रोने लगा है। अब हमें दर्द से दर्द नही लगेगा। क्योंकि दर्द हमको छू कर खुद सोने लगा है।
( बिजय शर्मा )


