मुझको छूके मुझको छूके पिघल रहे हो तुम , मेरे हमराह जल रहे हो तुम। चाँदनी छन रही है बादल से , जैसे कपड़े बदल रहे हो तुम। पायलें बज रही हैं रह रह कर , ये हवा है कि चल रहे हो तुम। नींद भी टूटने से डरती है , मेरे ख़्वाबों में ढल रहे हो तुम।
अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता, तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता, यह तो करिश्मा है मोहब्बत का.. वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता।
मेरी आँखों में झाँकने से पहले, जरा सोच लीजिये ऐ हुजूर.. जो हमने पलके झुका ली तो कयामत होगी, और हमने नजरें मिला ली तो मुहब्बत होगी।
किसी को उनसे मिल के इश्क़ हुवा, किसी को उनको देख के इश्क़ हुवा, एक हम ही थे जो उनको न देखे न मिले, हमको तो उनसे हुई बातों से ही उनसे इश्क़ हुवा।
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह, वो मिला भी हमसे अजनबी की तरह, किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी, छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह।
अपनी हर सांस में आबाद किया है तुमको, ऐ मेरी जाना बहुत याद किया है तुमको, मेरी जिंदगी में तुम नहीं तो कुछ भी नहीं, अपनी जिंदगी से बढ़कर प्यार किया है तुमको।